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शोधार्थियों को संबोधन

सहयोग की अपील
साथी
नमस्कार 

हम आपको बताना चाहते हैं कि नवम्बर,2009 से ही संचालित अपनी माटी एक त्रैमासिक ई-पत्रिका है जिसे अप्रैल, 2013 से ही प्ैैछ कोड आवंटित हो चुका है।इस पत्रिका को कला, साहित्य, रंगकर्म, सिनेमा, समाज, संगीत, पर्यावरण से जुड़े शोध, आलेख, बातचीत सहित तमाम साहित्यिक रचनाएँ छपने और पढ़ने हेतु एक साफ़-सुथरी जगह माना जा सकता है। न्यू मीडिया के बढ़ते दखल के बीच यह वेबपत्रिका एक माध्यमभर है जहां से हम अपनी बात अपने ढंग से कह सकते हैं। हमारी यह पत्रिका अप्रेल दो हज़ार तेरह से मासिक रूप से प्रकाशित हो रही है। प्रिंट में निकल रही सैंकड़ों लघु पत्रिकाओं के वर्चस्व और गंभीरता को सलाम करते हुए हमें लगा कि एक पाठक वर्ग इंटरनेट की पीढ़ी का भी है जिसके साथ चलने के लिहाज से  कुछ सार्थक काम करने की गुंजाईश है। किसी तरह के बड़े दावे या वादे तो नहीं हैं फिर भी हम अपनी गति से हम सार्थक दिशा में काम करना चाहते हैं यह सच है।

यहाँ उन सभी कार्यकर्ताओं,लेखक बंधुओं और कलाधर्मियों का स्वागत रहता है जो अपने परिवेश के सार्थक विचारों, घटनाओं और चर्चाओं को एक नए पाठक वर्ग के बीच पहुंचाने का मन रखते हैं। अपनी माटी संस्थान चित्तौड़गढ़ के तहत प्रकाशित इस पत्रिका के सम्पादक अशोक जमनानी है। आप भी इस हेतु अपनी मौलिक, अप्रकाशित और स्तरीय रचनाएं हमें ई-मेल से भेज सकते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक़ यह पत्रिका हर रोज चार सौ पाठकों द्वारा देखी जाती है, जिससे अब तक छ लाख पाठक जुड़ चुके हैं।इसके अतिरिक्त हम यथासम्भव हमारे चयनित आयोजनों में विमर्श प्रधान प्रस्तुति माटी के मीत और कविता पाठ प्रस्तुति किले में कविता को अपने उद्देश्यों तक पहुँचा रहे हैं। कुल मिलाकर इस मंच से साहित्य और संस्कृति के लगभग सभी पहलुओं के साथ युवाओं के सांस्कृतिक उन्नयन का प्रयास किया जाएगा।इन्टरनेट के विशाल जाल में अपनी माटी समूह के इस मामूली दखल से आप भी जुड़ेंगे तो हमें अच्छा लगेगा।यह सबकुछ हमारे संस्थान के सदस्यों और पत्रिका के विधिवत सम्पादक मंडल के निर्देशन में संपन्न हो रहा है।
हम इस बैनर के तहत भविष्य में जनपक्षधर विचारों को पोषित करने वाले आयोजनों में कविता कार्यशाला, रंगमंचीय प्रदर्शन, थिएटर कार्यशाला, प्रतिरोध से जुड़े फिल्म फेस्टिवल, कहानी-उपन्यास से सम्बद्ध संगोष्ठियों, राष्ट्रीय सेमीनार को अंजाम देने का मन रखते हैं। गौरतलब है कि हमारे साथी इस संस्थान को पूरी तरह से गैर-सरकारी और गैर-व्यावसायिक रवैये के साथ आगे बढ़ाने वाले मन के हैं। वर्तमान के इस साहित्यिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध करते हुए आगामी सालों में कुछ सार्थक आयोजन उपजाने में आपके सहयोग की ज़रूरत है।साथ ही अगर आप निरूस्वार्थभाव से अपनी माटी को किसी तरह का अनुदान या वित्तीय सहयोग देना चाहते हैं तो भी आपका हार्दिक स्वागत है।हमारे मुख पत्र प्रकाशन अपनी माटी त्रैमासिक पत्रिका में आपका स्वागत है।हम अपने नियमित अंकों में बाकी रचनाओं के साथ ही शोध आलेख भी प्रकाशित करते रहे हैं। अगर आप भी अपनी माटी में शोध पत्र छपवाने के इच्छुक हैं तो कृपया हमें हमारे नियमति अंक प्रकाशन की तारीखों में आलेख भेजें।हमारे सम्पादक बोर्ड द्वारा अगर आलेख का चयन किया जाता है तो हम आपको यथासमय सूचित करेंगे।छपने के बाद केवल उसी स्थिति में आपसे आर्थिक सहयोग की अपेक्षा है जब कोई शोधार्थी या कॉलेज प्रोफ़ेसर यदि अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ प्रकाशन सम्बन्धी प्रमाण पत्र चाहते हैं तो अपनी माटी संस्थान को आर्थिक सहयोग के रूप में सीधे हमारे खाते में न्यूनतम 500/-रुपये जमा कराएं ताकि हम अपने काम को बेहतर ढ़ंग से आगे बढ़ाते हुए आपको आलेख प्रकाशन का प्रमाण पत्र भी भेज सकें।राशि जमा करने के बाद हमें सूचित कर अपना पता भी बताएं जहां प्राप्ति रसीद भेजी जा सके।आपका यह सहयोग अपनी माटी की बाकी गतिविधियों को संचालित करने में बहुत बड़ी मदद साबित होगा।इस सहयोग राशि का आलेख प्रकाशन हेतु चयन की प्रक्रिया से कोई सम्बन्ध नहीं है।

अपनी माटी ई-पत्रिका और अपनी माटी संस्थान चित्तौड़गढ़ निस्वार्थ और स्वयंसेवा के भाव से संचालित एक संस्थानिक अभियान है।इस पत्रिका और संस्थान को किसी भी तरह से आर्थिक सपोर्ट करने के लिए आप सीधे हमारे निम्न बैंक खाते में चेक/ ड्राफ्ट/ नकद जमा कराके हमें अपना नाम और पता सूचित कर सकते हैं। 1000/- रुपए से ज्यादा के चंदे पर हम उनका नाम हमारी भामाशाह की सूची में दर्शाएंगे।हम आपके दिए हुए आर्थिक सहयोग का समुचित उपयोग करेंगे।मित्रो, अपनी माटी की सदस्यता हेतु सहयोग राशि के रूप में शुल्क 500/- रुपये वार्षिक रूप से रखा गया है जिसे आप सीधे हमारे बैंक खाते में जमा करा सकते हैं। जिन साथियो को यह अनुभव होता है कि वे अपनी माटी की गतिविधियों से सहमत हैं और इसके साथ वैचारिक सम्मति रखते हैं उनका सदस्यता के लिए स्वागत है।आपके सहयोग से यह पत्रिका और संस्थान नियमित रूप से पत्रिका प्रकाशन के साथ ही साहित्यिक आयोजन भी करता रहा है और आगे भी जारी रखेंगे।यह महज एक अपील है किसी भी तरह के आर्थिक सहयोग के बगैर भी आप लगातार बेहतर आलेखन के साथ हमें एक बड़ा सपोर्ट कर सकते हैं।कर भी रहे हैं।आपके इस सभी तरह के सहयोग का हम मान रखते हैं।धन्यवाद

योगदान हेतु बैंक खाते की विस्तृत जानकारी निम्न प्रकार है 
Bank: State Bank of India,Branch: Chittorgarh (Rajasthan)
Account Name: Apni Maati Sansthan(अपनी माटी संस्थान )
Account Number: 33444603964,IFSC Code: SBIN0006097


सचिव,अपनी माटी संस्थान,चित्तौड़गढ़
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ई-पत्रिका 'अपनी माटी' का 24वाँ अंक प्रकाशित


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